राजधानी से करीब 35 किमी0 दूर रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील में स्थित आशापुरी के जो मंदिर खुदाई में मिले हैं उनके निर्माण में लगभग 200 साल का समय लगा था। इन ऐतिहासिक मंदिरों से जुड़ी यह दिलचस्प जानकारी स्कूल आफ प्लालिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल और ब्रिटेन की कार्डिफ यूनिवर्सिटी के वेल्स स्कूल आफ आर्किटेक्चर की टीम के अध्ययन में सामने आई है। इन मंदिरों को बनाने का काम प्रतिहार काल में 9 वीं से 10 वीं सदी के बीच शुरू हुआ था। इसके बाद परमार काल में 10वीं सदी के मध्य से लेकर 11वीं सदी के अंत तक लगातार बनते रहें । खास बात यह है कि इन मंदिरों को बनाने में किसी भी प्रकार के मसालों का उपयोग नहीं हुआ बल्कि एक पत्थर के ऊपर दूसरे पत्थर को रखकर मंदिर तैयार किये गये थे। यहाॅ स्थित सभी 26 मंदिरों का निर्माण लगभग 10 हजार से ज्यादा पत्थरों से किया गया था।
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मंगलवार, 15 जुलाई 2014
Ashapuri devi आशापुरी के मंदिर
राजधानी से करीब 35 किमी0 दूर रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील में स्थित आशापुरी के जो मंदिर खुदाई में मिले हैं उनके निर्माण में लगभग 200 साल का समय लगा था। इन ऐतिहासिक मंदिरों से जुड़ी यह दिलचस्प जानकारी स्कूल आफ प्लालिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल और ब्रिटेन की कार्डिफ यूनिवर्सिटी के वेल्स स्कूल आफ आर्किटेक्चर की टीम के अध्ययन में सामने आई है। इन मंदिरों को बनाने का काम प्रतिहार काल में 9 वीं से 10 वीं सदी के बीच शुरू हुआ था। इसके बाद परमार काल में 10वीं सदी के मध्य से लेकर 11वीं सदी के अंत तक लगातार बनते रहें । खास बात यह है कि इन मंदिरों को बनाने में किसी भी प्रकार के मसालों का उपयोग नहीं हुआ बल्कि एक पत्थर के ऊपर दूसरे पत्थर को रखकर मंदिर तैयार किये गये थे। यहाॅ स्थित सभी 26 मंदिरों का निर्माण लगभग 10 हजार से ज्यादा पत्थरों से किया गया था।
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